एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतें देश के लाखों घरों के रसोई बजट का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। चाहे सुबह की चाय बनानी हो या रात का खाना, भारतीय परिवारों के लिए एलपीजी अब एक अनिवार्य आवश्यक वस्तु बन गई है। मार्च 20, 2026 से एलपीजी सिलेंडर की नई कीमतें लागू हो गई हैं, और इनकी जानकारी से आपके मासिक बजट पर प्रभाव पड़ सकता है।
एलपीजी सिलेंडर की कीमत कैसे तय होती है?
भारत में एलपीजी सिलेंडर की कीमतें सीधे सरकार द्वारा निर्धारित नहीं होतीं, बल्कि सरकारी तेल विपणन कंपनियों द्वारा तय की जाती हैं। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी प्रमुख कंपनियां हर महीने गैस सिलेंडर की कीमतों की समीक्षा करती हैं। यह समीक्षा अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और एलपीजी की कीमतों में होने वाले बदलावों पर आधारित होती है। इसके अलावा, डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की स्थिति, परिवहन खर्च, स्थानीय टैक्स और वितरण लागत जैसे कारक भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
घरेलू और व्यावसायिक सिलेंडरों का अंतर
भारत में दो मुख्य प्रकार के एलपीजी सिलेंडर उपयोग में लाए जाते हैं—घरेलू और व्यावसायिक। 14.2 किलोग्राम वाला घरेलू सिलेंडर आमतौर पर खाना पकाने के लिए इस्तेमाल होता है, जिस पर सरकार कुछ मामलों में सब्सिडी भी देती है। इसके विपरीत 19 किलोग्राम वाला व्यावसायिक सिलेंडर होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग जैसी जगहों पर प्रयोग होता है। इस प्रकार के सिलेंडर पर सब्सिडी नहीं मिलती, जिससे इसकी कीमत ज्यादा होती है।
विभिन्न शहरों में मूल्य भिन्नता
एलपीजी सिलेंडर की कीमतें शहर दर शहर बदलती रहती हैं क्योंकि स्थानीय टैक्स और परिवहन लागत अलग-अलग होते हैं। दिल्ली में 14.2 किलोग्राम घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत लगभग ₹853 है जबकि मुंबई में यह ₹852.50 तक उपलब्ध है। कोलकाता में यह कीमत ₹879 तक पहुंच सकती है, जो इसे अन्य शहरों से महंगा बनाती है। चेन्नई में घरेलू गैस का दाम लगभग ₹868.50 दर्ज किया गया है।
कमर्शियल गैस सिलेंडरों की घटती कीमतें
मार्च 20, 2026 को जारी नए आंकड़ों के अनुसार, हाल के समय में 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में थोड़ी कमी आई है। इस बदलाव से होटल, रेस्टोरेंट और छोटे फूड बिजनेस से जुड़े कारोबारियों को सीधा फायदा हुआ है क्योंकि इससे उनकी कुल लागत कम हो जाती है।
गैस सिलेंडरों की ये मूल्य भिन्नताएं देशभर के उपभोक्ताओं के जीवन पर एक बड़ा प्रभाव डालती हैं। खाद्य व्यवसायों के लिए कमर्शियल गैस की घटती दरें राहत लाती हैं जबकि घरेलू उपयोगकर्ताओं को स्थिर या बढ़ती दरों के साथ अपने बजट को समायोजित करना पड़ता है।
Disclaimer: इस लेख का उद्देश्य केवल जानकारी देना है। पाठकों से अनुरोध है कि वे अपडेटेड आंकड़ों के लिए स्थानीय विक्रेताओं या आधिकारिक स्रोतों से संपर्क करें।









